
पुराना श्यामबाजार हनुमान मंदिर की छत ढलाई में अलग-अलग समय पर पहुँचे दोनों नेतृत्व प्रतिनिधि
धनबाद/ सीजुआ
पुराना श्यामबाजार स्थित *हनुमान मंदिर की छत ढलाई* का कार्य रविवार को पूरे दिन चलता रहा। इसी क्रम में एक ही दिन लेकिन *अलग-अलग समय* पर दो प्रमुख जनप्रतिनिधि समूह मंदिर पहुंचे और श्रमदान कर निर्माण कार्य में योगदान दिया।
जिसके बाद क्षेत्र में “नेतृत्व प्रभाव और जनता के बीच पकड़” को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
*पहले पहुंचे झामुमो कतरास नगर अध्यक्ष सुमित कुमार महतो*
सुबह के समय *नगर अध्यक्ष सुमित कुमार महतो* मंदिर पहुंचे।
उन्होंने खुद कड़ाही उठाकर छत ढलाई में सीमेंट का गारा डाला और धार्मिक निर्माण कार्य को “समाजिक एकता का माध्यम” बताया।
महतो ने कहा —
“धर्म हमें सही राह दिखाता है और समाज में भाईचारा बढ़ाता है। यह मंदिर हमारा सामूहिक आस्था केंद्र है, और इसके विकास में हम सभी को जुड़ना चाहिए।”
*समिति व स्थानीय युवा उपस्थित रहे।*
*थोड़ी देर बाद पहुंचे बाघमारा विधायक पुत्र निशांत राज*
इसी दिन दोपहर *बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो* के पुत्र *निशांत राज* भी अपने समर्थकों के साथ मंदिर पहुंचे और श्रमदान करते हुए ढलाई कार्य में शामिल हुए।
निशांत राज ने कहा —
“सेवा और समर्पण ही हमारा मूल धर्म है। जनता और आस्था के प्रति हमारा दायित्व निरंतर है, यह एक दिन का कार्य नहीं।”
मौके पर उन्हें प्रबुधजनों द्वारा अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
*एक ही दिन, एक ही कार्यक्रम — पर अब तुलना शुरू*
स्थानीय नागरिकों में अब सवाल और चर्चा:
• किसका प्रभाव क्षेत्र में अधिक दिखाई दिया?
• किसने अधिक श्रमदान किया और किसका समर्थन जुटा?
• मंदिर निर्माण सेवा है या जनसमर्थन की मजबूती?
हालांकि दोनों पक्षों ने *धार्मिक भावना और सामाजिक सद्भाव की बात* कही,
लेकिन जनता इस पूरे घटनाक्रम को नेतृत्व प्रतिष्ठा के नजरिए से भी देख रही है।
*स्थानीय जनता का कहना*
“अगर यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है तो नुकसान कुछ नहीं — मंदिर भी मजबूत होगा और समाज में सक्रियता भी बढ़ेगी। बस दिखावा न हो, निरंतर योगदान हो।”
पुराना श्यामबाजार हनुमान मंदिर का निर्माण कार्य अब आस्था और नेतृत्व दोनों की उपस्थिति का केंद्र बन गया है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह सेवा की श्रृंखला आगे बढ़ती है
या
सम्मान और प्रभाव की नई राजनीतिक परतें खुलती हैं।












